गैस को रोकनाˈ क्यों हो सकता है आपके स्वास्थ्य के लिए एक साइलेंट किलरˌ

क्या आप भी अक्सर मीटिंग, यात्रा या किसी सामाजिक समारोह में असुविधा के कारण शरीर से निकलने वाली गैस (अपान वायु) को रोक लेते हैं? यह एक सामान्य आदत लग सकती है, लेकिन स्वदेशी चिकित्सा और आयुर्वेद के अनुसार, आप अनजाने में कई गंभीर बीमारियों को निमंत्रण दे रहे हैं।

प्रसिद्ध स्वदेशी चिकित्सा विशेषज्ञ राजीव दीक्षित जी अपनी पुस्तक में आयुर्वेद के एक महत्वपूर्ण सिद्धांत “अधारणीय वेग” का उल्लेख करते हैं, जिसका अर्थ है – शरीर की वो प्राकृतिक इच्छाएं जिन्हें कभी नहीं रोकना चाहिए। अपान वायु का वेग इनमें से एक प्रमुख वेग है।

जब आप इस प्राकृतिक वेग को जबरदस्ती रोकते हैं, तो यह वायु शरीर में गलत दिशा में घूमने लगती है और संतुलन बिगाड़ देती है, जिससे निम्नलिखित गंभीर रोग उत्पन्न हो सकते हैं:

गुल्म (पेट में ट्यूमर या वायु का गोला): रोकी गई गैस पेट के किसी हिस्से में जमा होकर एक दर्दनाक गांठ का रूप ले सकती है।

उदावर्त (ब्लोटिंग और एसिडिटी): पेट का फूलना और गैस का ऊपर की ओर चढ़ना, जिससे छाती में जलन और बेचैनी महसूस होती है।

शूल (तीव्र पेट दर्द): यह वायु पेट में फंसकर तेज और ऐंठन वाले दर्द का कारण बनती है।

हृदय रोग: आपको जानकर हैरानी होगी कि पेट में रुकी हुई गैस हृदय पर दबाव डाल सकती है, जो लंबे समय में हृदय रोगों का एक कारण बन सकता है।

अग्निमांद्य (पाचन शक्ति का कमजोर होना): यह आदत आपकी पाचन अग्नि को मंद कर देती है, जिससे भूख कम लगती है और भोजन ठीक से नहीं पचता।

अन्य समस्याएं: इसके अलावा, यह शारीरिक थकावट, मानसिक कमजोरी और आँखों से जुड़े रोगों का भी कारण बन सकती है।

निष्कर्ष:

आपका शरीर एक बुद्धिमान प्रणाली है जो संकेतों के माध्यम से आपसे बात करता है। इन प्राकृतिक संकेतों को नज़रअंदाज़ करना स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। अगली बार जब शरीर संकेत दे, तो किसी सुरक्षित स्थान पर जाकर उस वेग को मुक्त करें। स्वस्थ जीवन का पहला नियम शरीर का सम्मान करना है।

ज्ञान का खजाना: राजीव दीक्षित जी से सीखें स्वास्थ्य के रहस्य!

राजीव दीक्षित जी ने आयुर्वेद के ऐसे कई गहरे रहस्यों को सरल भाषा में समझाया है। यह जानकारी उसी विशाल खजाने का एक छोटा सा हिस्सा है। यदि आप इस पूरे ज्ञान में गोता लगाना चाहते हैं, तो यह आपके लिए एक सुनहरा अवसर है।

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