मृत व्यक्ति के पैर क्यों छुए जाते हैं?ˈ जानिए उस परंपरा का रहस्यमयी कारण जो बहुत कम लोग हैं जानते

Antim Sanskar Rituals: क्यों है मृत व्यक्ति के पैर छूने की परंपरा, क्या है इसके पीछे की वजह?

Antim Sanskar Rituals: सनातन धर्म में 16 संस्कारों का वर्णन किया गया है. इन्हीं में शामिल है दाह यानी अंतिम संस्कार. सनातन धर्म में मृत्यु के बाद व्यक्ति का अंतिम संस्कार किया जाता है. धर्म शास्त्रों में अंतिम संस्कार की कई परंपराएं और नियम बताए गए हैं. ऐसी ही एक पंरपरा है मृत व्यक्ति के पैरों को छूने की. किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद घर-परिवार में उससे छोटे लोग मृत व्यक्ति के पैरों को छूते हैं.

कई लोगों के मन में ये सलाव उठता है कि मृतक के पैर क्यों छुए जाते हैं? ऐसे में आइए जानते हैं कि ये परंपरा क्यों है? इस परंपरा के पीछे की वजह क्या है?

संस्कार और परंपरा

मृतक व्यक्ति के पैर उसके प्रति अंतिम सम्मान और आभार प्रकट करने के लिए छुए जाते हैं. मृत व्यक्ति के पैर छूकर उसके प्रति मौन धन्यवाद जताया जाता है. ऐसा करने से मृत व्यक्ति के प्रति समान का भाव प्रकट होता है. सनातन धर्म में पैर छूने की परंपरा है. बड़े-बुजुर्गों का पैर छूकर आशीर्वाद लिया जाता है. इसी परंपरा की वजह से मृत व्यक्ति के पैर छुए जाते हैं.

मृत व्यक्ति से लिया जाता है आशीर्वाद

यह एक प्रकार से मृत व्यक्ति के लिए अंतिम विदाई मानी जाती है. मृत्यु के बाद मृतक व्यक्ति की आत्मा का नया सफर शुरू हो जाता है. अंतिम बार मृत व्यक्ति के पैर छूकर उससे आशीर्वाद लिया जाता है. मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है. अपने को खोने बड़ा दुख इस जीवन में कोई दूसरा नहीं होता.

इसी दुख को कम करने और अंतिम समय में कुछ सुकून के पलों के लिए मृत व्यक्ति के पैर छुए जाते हैं. साथ ही अंतिम बार मृत व्यक्ति का चेहरा देखा जाता है. इससे सच्चाई को स्वीकारने में हिम्मत मिलती है और दर्द भी हल्का होता है.

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